वर्तमान में, छ: राज्यों में विश्व बैंक की सहायता से राज्य-व्यापी ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छंता परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। :
उत्तराखंड ग्रामीण जल आपूर्ति स्वच्छता परियोजना
एकल गांव योजनाएं (एसवीएस) 746 बसाहटों में पूरी की गई हैं तथा 107 बसाहटों में बहु गांव योजनाएं (एमवीएस) चलाने के लिए कार्यान्वायन चरण कार्य चल रहा है। परियोजना के अंतर्गत पूरी की गई जल आपूर्ति योजनाओं स 78,133 लोगों को लाभ मिला है। परियोजना हस्त क्षेप से 17% ग्राम पंचायतों को खुले में शौच जाने की प्रथा से मुक्ति मिली है (15% ग्राम पंचायतों के एमटीआर लक्ष्यस की तुलना में)। 40% परियोजना बसावटों में योजना कार्यान्विोत की जा रही हैं जबकि शेष 60% बसावटों को सितम्बलर, 2009 से मार्च, 2012 की अवधि के दौरान पूरा किया जाएगा (योजना चक्र के विभिन्नि चरणों के अंतर्गत)।
पंजाब ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छता परियोजना
स्वैप कार्यक्रम के अंतर्गत 31 मार्च, 2009 तक 384 गांवों को शामिल किया गया था। वर्ष 2009-10 के लिए 1,200 गाँवों का कवरेज लक्ष्ये रखा गया है। आईडीए वित्तह-पोषण के अंतर्गत कवर किए गए गांवों के प्राइवेट कनेक्शनों का प्रतिशत काफी अधिक है। राज्य ने मार्च, 2009 तक 245 गांवों में पेयजल के लिए रिवर्स ओसमोसिस संयंत्रों की स्थापना में पर्याप्त प्रगति की है। सामुदायिक स्वच्छता योजना कार्यान्वयन केवल एक गांव में शुरू हुआ है। इस उप घटक के लक्ष्यि को पूरा करने के लिए मतव्येयन उपचार संयंत्र हेतु भूमि की उपलब्धता की कमी एक बड़ी चिंता का विषय है। प्रापण, वित्ती्य प्रबंधन, प्रचलन और रखरखाव में जीपीडब्यूत्एससी के सदस्यों के लिए प्रशिक्षण सत्रों के समूहों में आयोजित किया जा रहा है। ओएण्डएम नियमावली उपलब्ध कराई गई है।
महाराष्ट्र ग्रामीणजल आपूर्ति और स्वच्छता परियोजना
इस परियोजना में सितम्बरर, 2009 त 784 गाम पंचायतों में निकास प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है, तथा अन्य 1961 ग्राम पंचायतों द्वारा मार्च, 2010 तक निकास प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाने की संभावना है और शेष 277 ग्राम पंचायतों , जहां योजनाओं को मार्च, 2010 तक पूरा किया जाएगा, वहां निकास प्रक्रिया को पूरा करने में मार्च, 2010 के बाद कुछ और महीने लगेंगे। इसलिए, जलस्वाराज्य परियोजना को एक वर्ष अर्थात् सितम्बंर, 2010 तक बढ़ाया गया है।
कर्नाटक ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छता परियोजना
कर्नाटक में, द्वितीय कर्नाटक ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छता परियोजना; जल निर्मल 2009 में समाप्तं हो गई थी। उन्होंने इस कार्यक्रम के अंतर्गत तृतीय परियोजना के लिए आगे अनुरोध किया था। विश्व बैंक की सहायता से चलाई जा रही जल निर्मल परियोजना (फरवरी, 2009 - जून, 2009) के कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले उत्साहजनक परिणामों की सराहना करते हुए विश्वप बैंक ने कर्नाटक में परियोजना को दोहराने के लिए ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छता क्षेत्र में राज्य सरकार की विकास पहलों के लिए अपना समर्थन देना जारी रखने की इच्छा व्यक्त की थी, ताकि कर्नाटक में मुख्यत: जल गुणवत्ता से प्रभावित बसाहटों के मुद्दों से समाधान किया जा सके।
आंध्र प्रदेश ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छता परियोजना
परियोजना वित्तीय समझौते पर हस्ताक्षर करने के साथ ही जनवरी, 2010 से शुरू हो गई है। परियोजना का उद्देश्य् आंध्र प्रदेश सरकार को उत्तरोत्तार विकेन्द्रीकरण, सामुदायिक भागीदारी और व्यापक जवाबदेही के जरिए ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छता सेवाओं में सुधार करना है। यह सूचित नीतिगत निर्णयों के लिए क्षेत्र विकास अध्ययनों सहित परियोजना कार्यकलापों के कार्यान्वायन, प्रबंधन और स्थायीरत के लिए संस्थागत क्षमता के निर्माण का समर्थन करता है। परियोजना में नए आधारभूत ढांचे या पुनर्वास के जरिए परियोजना बसावटों में जल आपूर्ति और स्व्च्छता सेवाओं में सुधारों के लिए भी घटक मौजूद हैं जो स्रोत सुदृढ़ता उपायों और स्वच्छता कार्यक्रमों से जुड़े हैं। परियोजना का लक्ष्य 6 जिलों में लगभग 2600 बसावटों को कवर करना है।





